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Thursday, January 24, 2019

प्रार्थना की ताकत

प्रार्थना की ताकत


प्रार्थना की ताकत:-

प्रार्थना की शक्ति दुनिया के किसी भी परमाणु बम की शक्ति से बड़ी है । प्रार्थना एक हथियार है जो सिर्फ मसीहियों के पास है क्योंकि हमारा परमेश्वर जीवित सुनने और उत्तर देने वाला परमेश्वर है । लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि आज मसीहीयों के पास प्रार्थना करने का वक्त नही है । आज के बहुत से मसीही प्रार्थना के द्वारा होने वाले असंभव कार्यो के अनुभव से कोसो दूर है , वे नही जान पाए की प्रार्थना की क्या ताकत है , प्रार्थना क्या क्या कर सकती है , इसलिए जीवित परमेश्वर की संतान होने के बावजूद खुद के जीवन में हताश निराश और परेशान से रहते है । और किसी भी तरीके से किसी अन्य लोगो के भी उद्धार का कारण नही बन पाते क्योंकि प्रार्थना रहित मसीही , सामर्थ्य रहित मसीही है । क्या हमने कभी इस बात पर ध्यान दिया है कि प्रभु यीशु मसीह ने कभी चेलो को प्रचार करना नही सिखाया , दुष्ट आत्माओ को निकालना नही सिखाया , लोगो की कॉउन्सल्लिंग करना नही सिखाया , चंगाई करने के तरीके को नही सिखाया परन्तु उसने चेलो को प्रार्थना करना सिखाया । क्योंकि प्रार्थना मसीही जीवन की बुनियाद है । 

प्रार्थना मसीही जीवन की ढाल है , चट्टान है । बगैर प्रार्थना जीवन जीने वाले मसीही का जीवन रेत में घर बनाने वालों के समान है जो आंधी आने पर तहस नहस हो जाते है अर्थात विपरीत परिस्थितियों में बिखर जाते है और हमे यह जानना चाहिए की मसीही जीवन है ही चिनौतियो का जीवन जो बगैर प्रार्थना के स्थिर रह ही नही सकती । हम बाइबल में से उन वचनो को पढ़ते है जिसमे यीशु मसीह के पवित्र स्वभाव के विषय में बताया गया है और हम मन में ऐसी चाह रखते है कि मुझे भी ऐसा ही जीवन जीना है लेकिन मैं आपको बताना चाहता हूँ बगैर प्रार्थना के हम सिर्फ प्रभु के स्वभाव को जीने की सिर्फ कल्पना कर सकते है जी नही सकते , पवित्र जीवन जीने के लिए सामर्थ्य हमे प्रार्थना से ही प्राप्त होती है । जब हम प्रार्थना करते है तो इस बात को प्रकट करते है कि हमारे जीवन की निर्भरता यीशु पर है , हमारी आशा किसी धन , पहुंच ( सोर्स ) , पर नही वरन परमेश्वर पर है जिसे हम प्रार्थना के द्वारा प्रकट करते है ।

प्रार्थना करना यह दर्शाती है कि हम निर्बल है पवित्र जीवन जीने में , परिस्थितियों पर खुद की शक्ति से जय प्राप्त करने में । बाइबल में बहुत से उदाहरण पाए जाते है जहाँ किसी अन्य युक्ति बुद्धि शक्ति के द्वारा नही सिर्फ प्रार्थना के द्वारा असम्भव से परिस्थितियों को विजय के रूप में प्राप्त किया गया है । यदि आप यह जानना चाहते है कि हमारे जीवन में प्रमुख कौन है हम किस पर निर्भर है यीशु पर या हमारे खुद के बल और शक्ति पर तो आज एक संकेत मैं आपको देता हूँ यदि आपका भरोषा यीशु पर है तो आप प्रार्थना में जरूर वक्त बिताते होंगे और परमेश्वर के हाथों में अपने सभी फैसले , परिस्थितियो को सौंप देते होंगे और अपने सभी कार्यो के लिए अगुवाई मांगते होंगे और यदि यीशु नही है तो बगैर प्रार्थना के ही अपने बुद्धि से चीजो का समाधान करने निकल जाते होंगे । 

प्रभु आपके साथ है वो आपसे बेहद प्यार करते है और चाहते है कि प्रार्थना की ओर मन फिराए और एक विजयी मसीही जीवन व्यापन करे ।

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