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Thursday, January 31, 2019

ईश्वरीय भेदों का प्रकाश

                         ईश्वरीय भेदों का प्रकाश



ईश्वरीय भेदों का प्रकाश:-

परमेश्वर के दास भाई बख्तसिंग के द्वारा लिखित और प्रकाशित की गई पुस्तक में से

जनवरी ३१

“क्योंकि हम जीते जी सर्वदा यीशु के कारण मृत्यु के हाथ में सौंपे जाते हैं कि यीशु का जीवन भी हमारे मरनहार शरीर में प्रगट हो।” (२ कुरिन्थियों  ४:११)

      खुद एक विजयी जीवन जीये, ऐसी परमेश्वर की इस इच्छा को समझने में कुरिन्थि के विश्वासी निष्फल हो गये। उनके जीवन में अनेक प्रकार की निष्फलतायें एवं निर्बलतायें थी। प्रेरित पौलुस, पतरस और अपुल्लोस जैसे  सेवकों द्वारा परमेश्वर का वचन उनको सिखाया गया था। फिर भी वे आत्मिक रीति से बालक ही थे (१ कुरिन्थियों ३: १, २)। आज भी कई विश्वासी लोग आत्मिक रीति से बालक ही रहते हैं। उनमें निष्फलतायें और पतन दिखाई देते हैं। आत्मिक रीति से वे बोझ और परमेश्वर के वचन के रहस्यों को समझने में पंगु जीवन ही जीते हैं। शैतान के द्वारा वे धोखा खाते हैं, विभिन्न प्रकार की परीक्षाओं में और झूठी शिक्षा में फँस जाते हैं।

      इन सबका कारण यह है कि वे मसीह के क्रूस को उचित रीति से नहीं समझते। आत्मिक वृद्धि के लिये मसीह के क्रूस को समझने की जरुरत है। आप चाहे कितना ही कठिन कार्य करें, चाहे कितनी ही लम्बी प्रार्थना करें, चाहे कितनी ही बाइबल ज्ञान प्राप्त करें, परन्तु मसीह के क्रूस की एकता में नहीं आते तो परमेश्वर की सामर्थ आपमें प्रगट नहीं होगी। प्रेरित पौलुस के लिये क्रूस यह दैनिक अनुभव था (गलतियों ६ः१४)। अब क्रूस तो आप जो सहते हैं वह शारीरिक दुःख या मानसिक वेदना नहीं है। क्रूस में मसीह की मृत्यु, गाड़े जाने और पुनरूत्थान ये तीनों ही शामिल हैं। मसीह हमारे पापों के लिये मारा गया और हममें जीने के लिये फिर जी उठा। आत्मिक वृद्धि पाने के लिये प्रभु का हृदयपूर्वक धन्यवाद मानीये कि वह आपके पापों का दंड भोगने के लिये मरा। और आपके पापी स्वभाव के लिये आप मृत्यु पाये इस कारण भी वह मरा। आपको पापी स्वभाव के विषय मरना पड़ेगा, तो ही आप पाप के ऊपर जय पा सकेंगे। उसके लिये विश्वासपूर्वक प्रभु यीशु मसीह की मृत्यु की शक्ति को आपके अंदर लीजिये। विश्वास से कहिये, ‘प्रभु, मैं अपने अंदर क्रोध, ईर्ष्या, अभिलाषा इत्यादि इत्यादि पापों को देख रहा हूँ। मैं अपने बल में उन सबके ऊपर जय प्राप्त नहीं कर सकता हूँ। कृपा करके आपकी मृत्यु की सामर्थ मुझमें ऊंडेलोगे?’ तभी आप पापी स्वभाव के संबंधमें मृत्यु पायेंगे। प्रेरित पौलुस कह सका, ‘मैं मसीह के साथ क्रूस पर चढ़ाया गया हूँ।’ खुद के विषय में मृत्यु पाना यह हमारा दैनिक अनुभव होना चाहिये।

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