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Thursday, October 18, 2018

आज हमें पनाह कहाँ मिल सकती है - Jesus Hindi



परमेश्वर के प्रेम में बने रहिए?

परमेश्वर से प्यार करने का क्या मतलब है?


हम परमेश्वर के प्यार में कैसे बने रह सकते हैं?


जो यहोवा के प्यार में बने रहते हैं उन्हें वह कैसे इनाम देगा?


क्या आप मुसीबतों के तूफान में यहोवा की पनाह लेंगे?

1, 2. आज हमें पनाह कहाँ मिल सकती है?
मान लीजिए आप सड़क पर चले जा रहे हैं। मौसम देखकर लगता है कि तूफान आनेवाला है। फिर देखते-ही-देखते आसमान में काली घटाएँ छाने लगती हैं। बिजलियाँ कड़कने लगती हैं और बादलों की तेज़ गर्जन से कान फटने लगते हैं। और फिर मूसलाधार बारिश होने लगती है। आप यहाँ-वहाँ भागते हैं और सिर छिपाने की जगह ढूँढ़ते हैं। तभी आपको सड़क के किनारे एक घर नज़र आता है। यह एक मज़बूत मकान है, जिसमें पनाह लेकर आप तूफान से बच सकते हैं। इस मकान से मिलनेवाली हिफाज़त के लिए आप कितने एहसानमंद होंगे!

2 आज हम भी मुसीबतों के तूफान में घिरे हुए हैं। दुनिया के हालात बद-से-बदतर होते जा रहे हैं। मगर हमारे लिए भी एक पनाह मौजूद है, जिसकी हिफाज़त में रहने से हमें ऐसा कोई नुकसान नहीं होगा, जिसकी भरपाई न की जा सके। वह पनाह क्या है? गौर कीजिए कि बाइबल क्या सिखाती है: “मैं यहोवा के विषय कहूंगा, कि वह मेरा शरणस्थान और गढ़ है; वह मेरा परमेश्वर है, मैं उस पर भरोसा रखूंगा।”—भजन 91:2.

3. हम यहोवा की पनाह में कैसे आ सकते हैं?
3 यह क्या ही हैरतअँगेज़ बात है कि पूरे जहान को बनानेवाला, महाराजाधिराज यहोवा हमें पनाह दे सकता है! हम उसकी पनाह में सही-सलामत रह सकते हैं, क्योंकि वह ऐसे हर प्राणी और ऐसी हर चीज़ से कहीं ज़्यादा ताकतवर है, जो हमें नुकसान पहुँचा सकती है। चाहे हमारे साथ कितनी ही बुराई क्यों न हुई हो और हमने कितने ही गम क्यों न झेले हों, यहोवा हमारे हर घाव को भर सकता है और उसके हर बुरे अंजाम को मिटा सकता है। हम यहोवा की पनाह में कैसे आ सकते हैं? हमें उस पर पूरा भरोसा रखना होगा। यही नहीं, परमेश्वर का वचन हमसे गुज़ारिश करता है: “अपने आप को परमेश्वर के प्रेम में बनाए रखो।” (यहूदा 21) जी हाँ, हमें परमेश्वर के प्रेम में बने रहना होगा, यानी अपने स्वर्गीय पिता के साथ प्यार का एक मज़बूत रिश्ता कायम रखना होगा। तभी हम पक्का यकीन रख सकते हैं कि यहोवा हमारा शरणस्थान है। मगर हम यह रिश्ता कैसे कायम कर सकते हैं?

परमेश्वर के प्यार को पहचानिए और उसके लिए कदर दिखाइए

4, 5. ऐसे कुछ तरीके क्या हैं जिनसे यहोवा ने हमारे लिए प्यार दिखाया है?

4 यहोवा के प्यार में बने रहने के लिए यह जानना ज़रूरी है कि उसने किन तरीकों से हमें प्यार दिखाया है। ज़रा सोचिए, आपने इस किताब की मदद से परमेश्वर के प्यार के बारे में बाइबल से क्या-क्या सीखा है। आपने जाना है कि सिरजनहार यहोवा ने हमारे रहने के लिए यह खूबसूरत धरती बनायी है। उसने इस धरती को तरह-तरह की खाने-पीने की चीज़ों, हवा-पानी और कुदरती साधनों से मालामाल किया है। उसने मन को मोहनेवाले परिंदे और जीव-जंतु, साथ ही दिलकश नज़ारे भी बनाए हैं। आपने यह भी सीखा है कि परमेश्वर ने हमारे लिए बाइबल लिखवायी है और उसमें अपना नाम और अपने अलग-अलग गुण बताए हैं। यही नहीं, परमेश्वर ने अपने वचन में बताया है कि उसने हमें एक नायाब तोहफा दिया है। उसने अपने प्यारे बेटे यीशु को धरती पर भेजा ताकि वह हमारे लिए दुःख सहे और अपनी जान कुरबान करे। (यूहन्ना 3:16) परमेश्वर का यह तोहफा हमारे लिए क्या मायने रखता है? यह हमें एक शानदार भविष्य की आशा देता है।

5 भविष्य की हमारी इस आशा को पूरा करने के लिए परमेश्वर ने एक और इंतज़ाम किया है। उसने स्वर्ग में एक सरकार बनायी है, जिसे मसीहाई राज्य कहा जाता है। यह सरकार बहुत जल्द दुनिया के तमाम दुःखों को मिटा देगी और धरती को एक फिरदौस बनाएगी। ज़रा सोचिए! उस खूबसूरत फिरदौस में हम हमेशा के लिए शांति और खुशी से जी सकेंगे। (भजन 37:29) यह तो भविष्य की बात हुई, लेकिन आज भी परमेश्वर हमें सिखा रहा है कि हम एक बेहतरीन ज़िंदगी कैसे जी सकते हैं। उसने हमें प्रार्थना का वरदान भी दिया है, जिसके ज़रिए हम किसी भी वक्‍त और कहीं पर भी उससे बात कर सकते हैं। यहोवा ने और भी कई तरीकों से सब इंसानों के लिए प्यार दिखाया है, जी हाँ, आपके लिए भी।

6. यहोवा ने आपके लिए जो प्यार दिखाया है, उसके लिए आप कदर कैसे दिखा सकते हैं?

6 अब आपको इस ज़रूरी सवाल का जवाब देना है: मैं यहोवा के प्यार के लिए कदर कैसे दिखाऊँ? कई लोग जवाब देंगे, “बदले में मुझे भी यहोवा से प्यार करना चाहिए।” क्या आप भी ऐसा ही महसूस करते हैं? यीशु ने कहा था कि सबसे बड़ी आज्ञा यह है: “तू परमेश्वर [यहोवा] अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख।” (मत्ती 22:37) यहोवा परमेश्वर से प्यार करने की बेशक आपके पास कई वजह हैं। मगर क्या यहोवा को अपने सारे मन, प्राण और बुद्धि से प्यार करने का मतलब बस इतना है कि आपके दिल में उसके लिए प्यार की सिर्फ एक भावना हो?

7. क्या परमेश्वर से प्यार करने का मतलब, उसके लिए प्यार की सिर्फ भावना रखना है? समझाइए।

7 बाइबल में समझाया गया है कि यहोवा के लिए दिल में प्यार महसूस करना काफी नहीं है। हालाँकि इस भावना का होना ज़रूरी है, मगर यह सच्चे प्यार की महज़ एक शुरूआत है। इसे समझने के लिए आइए एक मिसाल लें। सेब का पेड़ उगाने के लिए सेब का बीज ज़रूरी होता है। लेकिन अगर आप किसी से पूरा सेब माँगें और वह आपके हाथ में सिर्फ सेब का बीज थमा दे, तो क्या आप खुश होंगे? बिलकुल नहीं! उसी तरह यहोवा के लिए सिर्फ प्यार की भावना होना काफी नहीं, यह तो बस एक शुरूआत है। वह हमसे पूरा और सच्चा प्यार चाहता है। यह प्यार कैसे दिखाया जाता है? बाइबल सिखाती है: “परमेश्वर का प्रेम यह है, कि हम उस की आज्ञाओं को मानें; और उस की आज्ञाएं कठिन नहीं।” (1 यूहन्ना 5:3) इसका मतलब है कि परमेश्वर के लिए सच्चा प्यार हमारे अच्छे फलों से यानी हमारे कामों से दिखायी देगा।—मत्ती 7:16-20.

8, 9. हम परमेश्वर के लिए प्यार और कदरदानी कैसे दिखा सकते

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