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Tuesday, October 16, 2018

संध्या आत्मिक भोजन - Yeeshu


संध्या आत्मिक भोजन

"HEADING- क्या क्षमा प्राप्त की? मैं परमेश्वर से कैसे क्षमा प्राप्त कर सकता हूँ?

प्रेरितों के काम 13:38 घोषणा करता है कि, "इसलिये, हे भाइयों, तुम जान लो कि इसी यीशु के द्वारा पापों की क्षमा का समाचार तुम्हें दिया जाता है।"

क्षमा क्या है तथा मुझे इसकी क्यों आवश्यकता है?

शब्द "क्षमा" का अर्थ तख्ती को पोंछ कर साफ करना, माफ करना, उधार को रद्द या निरस्त कर दिया जाना है। जब हम किसी के प्रति कुछ गलत करते हैं, तो हम उससे क्षमा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं ताकि हमारे सम्बन्ध पुनः स्थापित हो जाए। क्षमा इसलिए प्रदान नहीं की जाती है क्योंकि कोई व्यक्ति क्षमा प्राप्त के योग्य है। कोई भी क्षमा प्राप्ति के योग्य नहीं है। क्षमा प्रेम, दया तथा अनुग्रह का एक कार्य है। क्षमा अन्य व्यक्ति के विरुद्ध भी कुछ भी पकडे़ रखने के प्रति एक निर्णय है, चाहे उसने आपके प्रति कुछ भी क्यों न किया हो।

बाइबल हमें बताती है कि हम सब को परमेश्वर से क्षमा प्राप्त करने की आवश्कता है। हम सभी ने पाप किया है । सभोपदेश्क 7:20 घोषणा करता है कि, "निःसंदेह पृथ्वी पर ऐसा कोई धर्मी मनुष्य नहीं जो भलाई ही करे और जिस से पाप न हुआ है।" 1यूहन्ना 1:8 कहता है, "यदि हम कहें कि हम में कुछ भी पाप नहीं, तो अपने आप को धोखा देते हैं, और हम में सत्य नहीं।" सारे पाप आखिरकार परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह का एक कार्य है (भजन संहिता 51:4) । परिणामस्वरूप, हमें परमेश्वर की क्षमा की अत्यावश्यकतापूर्वक आवश्यकता होती है। यदि हमारे पाप क्षमा नहीं हुए, तो हम अनन्तकाल तक अपने पापों के परिणाम का दुख भोगते रहेंगे (मत्ती 25:46, यूहन्ना 3:36)।

क्षमा- यह मुझे कैसे मिल सकती है?

धन्यवाद की बात यह है कि, परमेश्वर प्रेमी और दयालु - हमें हमारे पापों को क्षमा करने के लिए तत्पर है! 2 पतरस 3:9 हमें बताता है कि, "… पर तुम्हारे विषय में धीरज धरता है, और नहीं चाहता कि कोई नष्ट हो वरन् यह कि सबको मन फिराव का अवसर मिले।" परमेश्वर हमें क्षमा करने की इच्छा रखता है, इसलिये उसने हमारे लिए क्षमा उपलब्ध की है।

हमारे पापों के लिए न्यायोचित दण्ड केवल मृत्यु है। रोमियों 6:23 का आरम्भिक हिस्सा यह बताता है कि, "क्योंकि पाप की मजदूरी तो मृत्यु है… " अनन्त मृत्यु ही वह है जिसे हमने अपने पापों के लिए अर्जित किया है।” परमेश्वर, अपनी पूर्ण योजना के अनुसार, मनुष्य - यीशु मसीह (यूहन्ना 1:1;14) बना। यीशु क्रूस पर, उस दण्ड को लेते हुए मरा जिसके लायक हम थे अर्थात् - मृत्यु। 2कुरिन्थियों 5:21 हमें शिक्षा देता है कि, "जो पाप से अज्ञात था, उसी को उसने हमारे लिए पाप ठहराया कि हम उसमें होकर परमेश्वर की धार्मिकता बन जाएँ।" यीशु क्रूस पर, उस दण्ड को लेते हुए मरा जिसके लायक हम थे! परमेश्वर के रूप में, यीशु की मृत्यु ने समस्त संसार के पापों के लिए क्षमा का प्रबन्ध किया। 1यूहन्ना 2:2 घोषणा करता है, "और वही हमारे पापों का प्रायश्चित है, और केवल हमारे ही नहीं, वरन् सारे जगत के पापों का भी।" यीशु मुर्दों में से, पाप और मृत्यु पर अपनी विजय की उदघोषणा करते हुए जी उठे (1कुरिन्थियों 15:1-28)। परमेश्वर की स्तुति हो, यीशु की मृत्यु और पुनरूत्थान के द्वारा, रोमियों 6:23 का दूसरा भाग सत्य हो गया, "… परन्तु परमेश्वर का वरदान हमारे प्रभु यीशु मसीह में अनन्त जीवन है।"

क्या आप अपने पापों की क्षमा चाहते हैं? क्या आप अपराध बोध की पीछे पड़ जाने वाली भावना से ग्रसित हैं कि आप इससे छुटकारा नहीं पा सकते हैं? आपके पापों के लिए क्षमा उपलब्ध है यदि आप उद्धारकर्ता के रूप में यीशु मसीह में अपने विश्वास को रखते हैं। इफिसियों 1:7 कहता है कि, "हम को उस में उसके लहू के द्वारा छुटकारा, अर्थात अपराधों की क्षमा उसके उस अनुग्रह के धन के अनुसार मिला है ।" यीशु ने हमारे लिये हमारा कर्ज चुकाया, ताकि हम क्षमा प्राप्त कर सकें। आपको बस इतना करना है कि आप परमेश्वर से यह विश्वास करते हुए विनती करें कि वह आपको यीशु के द्वारा क्षमा प्रदान करे क्योंकि यीशु हमारी क्षमा की कीमत चुकाने के लिए मरा -और वह आपको क्षमा कर देगा।! यूहन्ना 3:16-17 में यह सुन्दर सन्देश मिलता है कि, "क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे वह नष्ट न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। परमेश्वर ने अपने पुत्र को जगत में इसलिए नहीं भेजा कि जगत पर दण्ड की आज्ञा दे, परन्तु इसलिए कि जगत उसके द्वारा उद्धार पाए।"

क्षमा - क्या यह प्राप्त करना वास्तव में इतना आसान है?

हाँ, यह इतना आसान है! आप परमेश्वर से क्षमा को कमा नहीं सकते। आप परमेश्वर के द्वारा दी गई क्षमा का दाम नहीं चुका सकते। आप केवल इसे विश्वास के माध्यम से, परमेश्वर के अनुग्रह तथा दया के द्वारा प्राप्त कर सकते हैं। यदि आप यीशु मसीह को अपने उद्धारकर्ता के रूप में ग्रहण करना चाहते हैं, तो यहाँ पर एक सरल प्रार्थना दी गई है जिसे आप कर सकते हैं। इस प्रार्थना या कोई अन्य प्रार्थना का बोलना आपको बचा नहीं सकता है। केवल यीशु में विश्वास ही है जो आपको पाप से बचा सकता है। यह प्रार्थना उसमें अपने विश्वास को व्यक्त करने और आपके लिए उद्धार का प्रबन्ध करने के लिए धन्यवाद देने का एक तरीका मात्र है। "हे, परमेश्वर, मैं जानता हूँ कि मैं ने आप के विरुद्ध पाप किया है, और मैं सजा का पात्र हूँ। परन्तु यीशु मसीह ने उस सजा को स्वयं पर ले लिया जिसके योग्य मैं था ताकि उसमें विश्वास करने के द्वारा मैं क्षमा किया जा सकूँ। मैं उद्धार के लिए आपमें अपने विश्वास को रखता हूँ। आपके अद्भुत अनुग्रह तथा क्षमा – जो अनन्त जीवन का उपहार है, के लिए मैं आपका धन्यवाद करता हूँ!

✝आमीन आमीन अमीन✝
*प्रभु इन वचनो के



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प्रातः आत्मिक भोजन

HEADING-क्या उद्धार केवल विश्वास के द्वारा है, या विश्वास के साथ कर्मों के द्वारा?

यह शायद पूरे मसीही धर्मविज्ञान में एक सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है। यही प्रश्न उस सुधारवाद का कारण बना है – जिसने प्रोटेस्टैन्ट कलीसियाओं और कैथोलिक कलीसिया के मध्य विभाजन कर दिया। यह प्रश्न बाइबल आधारित मसीहियत और अधिकांश "मसीही" भ्रान्त शिक्षाओं के मध्य एक महत्वपूर्ण भिन्नता की कुँजी है। क्या उद्धार केवल विश्वास के द्वारा है या विश्वास और कर्मों के द्वारा? क्या मुझे केवल यीशु पर विश्वास करने से उद्धार प्राप्त हो जायेगा, या मुझे यीशु में विश्वास के साथ निश्चित कार्यों को भी करना होगा?

केवल विश्वास या विश्वास के साथ कर्मों के प्रश्न को बाइबल के कुछ न-समझौता-किए जाने वाले संदर्भों के द्वारा कठिन बना दिया गया है। रोमियों 3:28; 5:1 और गलातियों 3:24 की याकूब 2:24 के साथ तुलना करें। कुछ लोग पौलुस (केवल विश्वास के द्वारा उद्धार है) और याकूब (उद्धार विश्वास और कर्मों के द्वारा है) के मध्य में भिन्नता पाते हैं। पौलुस धर्मसैद्धान्तिक रूप के साथ कहता है कि धर्मी बनाया जाना केवल विश्वास के द्वारा होता है (इफिसियों 2:8-9), जबकि याकूब को ऐसा कहते हुए पाया जाता है कि धर्मी बनाया जाना विश्वास और कर्मों के द्वारा है। इस दृश्य समस्या का समाधान इस बात की जाँच करने से होता है कि वास्तव में याकूब सही में किस बारे में बात कर रहा है। याकूब उस मान्यता का खण्डन करता है कि कोई व्यक्ति अच्छे कार्यों के बिना विश्वास को प्राप्त कर सकता है (याकूब 2:17-18)। याकूब इस बात पर ज़ोर डाल रहा है कि मसीह एक परिवर्तित जीवन और अच्छे कार्यों को उत्पन्न करेगा (याकूब 2:20-26)। याकूब यह नहीं कह रहा है कि धर्मी बनाया जाना विश्वास और कर्मों के द्वारा है, परन्तु वह यह कह रहा है कि जब एक व्यक्ति विश्वास के द्वारा सच्चाई से धर्मी बन जाता है तो उसके जीवन में अच्छे कर्म होंगे। यदि एक व्यक्ति विश्वासी होने का दावा करता है, परन्तु उसके जीवन में अच्छे कार्य नहीं होते हैं, तब उसमें मसीह के प्रति सच्चा विश्वास नहीं होता है (याकूब 2:14,17,20,26)।

पौलुस भी अपने लेखों में यही बातें कहता है। विश्वासियों के जीवन में जो अच्छा फल होना चाहिये वह गलातियों 5:22-23 में सूचीबद्ध है। यह बताने के तुरन्त बाद कि हम विश्वास के द्वारा उद्धार पाते हैं, न कि कर्मों के द्वारा (इफिसियों 2:8-9), पौलुस हमें सूचित करता है कि हमारी रचना अच्छे कर्म को उत्पन्न करने के लिए की गई थी (इफिसियों 2:10)। जितनी याकूब एक परिवर्तित जीवन से अपेक्षा करता है उतनी ही पौलुस करता है: "इसलिए यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्टि है : पुरानी बातें बीत गईं, देखो, सब नई हो गई हैं"(2 कुरिन्थियों 5:17)! याकूब और पौलुस उद्धार के ऊपर अपनी शिक्षा के प्रति असहमत नहीं हैं। वे एक ही विषय के ऊपर भिन्न दृष्टिकोणों से पहुँचते हैं। पौलुस ने सरलता से इस बात पर ज़ोर दिया कि धर्मी बनाया जाना केवल विश्वास द्वारा ही होता है जबकि याकूब ने इस सत्य पर महत्व दिया कि मसीह में सच्चा विश्वास अच्छे कर्मों को उत्पन्न करता है।

✝आमीन आमीन अमीन✝
प्रभु इन वचनो के द्वारा हम सबों को आशीष देवे।

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