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Thursday, October 11, 2018

Jesus Of Birth - प्रभु यीशु के जन्म की कहानी

प्रभु यीशु के जन्म की कहानी


आप सभी क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनाये। आज ही के दिन जीसस क्राइस्ट ने इस धरती पर जन्म दिया था। आइये, आज हम उनके जन्म की पूरी कहानी जाते हैं।

लगभग 2000 साल पहले जब यहूदिया (जुडिया), जो अब इजराइल का हिस्सा है; में राजा हेरोदेस (राजा हेरोदेस) का शासन था, तब भगवान ने गेब्रियल नाम के एक फ़िरशते को नासरत  में रहने वाला एक युवा महिला के पास भेजा। उसका नाम मरियम (मैरी) था और उसकी शादी यूसुफ नाम के एक नवयुद्ध से होने वाली थी।

गेब्रियल ने मरियम से कहा, "पीस बी विथ यू! भगवान तुमसे खुश हैं और उन्होंने तुम्हे आशीर्वाद दिया है! "
मरियम फ़िरशते को देखकर आश्चर्यचकित था, और सोच रहा था की फ़िरशेट की बात का क्या मतलब है।
फ़िरशते ने कहा,


डरो मत, ईश्वर की तुम पर बड़ा कृपा है। आप एक पवित्र आत्मा के माध्यम से गर्भवती इच्छा और एक बालक को जन्म दोगी और उसे तुम जीस (जीसस) कह कर पुकारोगी। वो भगवान का अपना बेटा होगा और उसका राज्य कभी नहीं होगा।


मरियम डरी हुई थी लेकिन उसको ईश्वर पर भरोसा था।

वही हो जो भगवान ने चाहा है।

मरियम ने फ़िरशते को जवाब दिया।

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गेब्रियल ने मरियम से ये भी मांग कि उसकी कज़न एलिज़ाबेथ, सब कुछ लोग मानते थे कि अब वो माँ नहीं बन सकता है, एक भी बेटा ईश्वर ने कहा कि यीशु का मार्ग तैयार करने के लिए चुना गया है।

इसके बाद मरियम ने अपने परिवार को अलविदा कहा और अपने कज़न एलिज़ाबेथ और उसके पति जकर्याह (जकर्याह) से मिल गया। एलिज़ाबेथ मरियम को देख कर बहुत खुश हो गया। पहले से पता पता था कि मरियम को ईश्वर के पुत्र की माँ बनने के लिए चुना गया है।

दरअसल, एक फ़िरशते ने पहले ही जकर्याह को बताया था कि भविष्य में एलिज़ाबेथ का पुत्र ही लोग को यीशु के स्वागत के लिए तैयार मांग और उसका नाम जॉन होगा। मरियम अगले तीन महीनो तक एलिज़ाबेथ के साथ रही और फिर वापस नासरत चली गया।

जब यूसुफ को पता चला कि उसकी हो रही बीवी पहले से ही गर्भवती है तो उसे चिंता होने लगी। वह सोचने लगा कि क्या उसे इस शादी के लिए मना कर देना चाहिए। पर जल्द ही उसे भी एक फ़िरशते ने सपने में आकर यीशु के जन्म की बात बता दी दी और उसे शादी से ना डरने की सलाह दी। इसके बाद युसुफ ने मरियम से शादी कर ली ली।

उस समय, मरियम और युसुफ जहां रहते थे वो रोमन एम्पायर का हिस्सा था और अर्जस (अगस्तस) उनका राजा था। राजा चाहता था कि उसके राज्य में जितने भी लोग हैं उनके नाम की एक लिस्ट तैयार की जा रही हर किसी से टैक्स वसुला जावर।
उसने आदेश दिया कि हर किसी को उस जगह पर लौटना होगा जहां का मूल निवासी है और आपका एक रजिस्टर में दर्ज कराना होगा।

इसके बाद मरियम और युसुफ नासरत से 70 मील की यात्रा कर बेतलेहेम (बेथलहम) पहुंचे, क्योंकि यूसुफ वही का मूल निवासी था।
यह यात्रा वैसे ही कठिन था मरियम के गर्भवती होने के कारण यह भी मुश्किल हो गया था।
जब वे बेतलेहेम पहुंचे तो नाम पंजीकरण करवाना के लिए पहले से ही हीनी भीड़ था कि उन्हें रहने की कोई सही जगह नहीं मिला।
आवास की एकमात्र जगह जो से ढूंढें वो था जानवरों के बीच।


उस समय लोग खुद को गर्म रखने के लिए अक्सर घर के अंदरूनी जानवरों को रखने के लिए थे, खाड़ी पर रात का समय। और वह वो जगह जगह था जहां मरियम ने प्रभु यीशु को जन्म दिया।
बेतलेहेम के बाहर उपस्थित गड़ेरई जब रात भर अपने होंठ की देखभाल कर रहे थे। जब सुबह हुई तब भी उनके साथ एक आश्चर्यजनक घटना हुई। 

अगली सुबह एक फ़िरशाह लोग सामने आया। गड़ेरिये पहले तो उसे देखकर काफी डर गए पर फ़िरशते ने उनसे कहा,
डरो मत मेरे पास तुम्हारे लिए एक अच्छी खबर है। आज बेतलेहेम में तुम्हारे लिए एक रखवाले ने जन्म दिया है और वो तुम्हे जानवरों की चारा खिलाने वाली एक नंद में मिलगा।
इसके बाद कई और फ़िरश्ते प्रकट हुए और आकाश में प्रकाश फ़ेल गया। और वे ईश्वर की प्रशंसा में गाने लगे।
फरिश्तों के जाने के बाद गड़ेरियां ने आप में कहा, "चलो, बेतलेहेम चलते हैं और वहां जाकर देख रहे हैं कि क्या हुआ।"

सभी गड़ेर बेतलेहेम पहुंचे और वहां उन्होंने यीशु को एक नंद में लेटे देखा देखा, जैसा कि फ़िरशते ने किया था। धीरे-धीरे यह बात फैक्टरी लगी ... सभी आश्चर्यचकित थे।
जब यीशु पैदा हुआ तो आकाश में एक नया सितारा मनाया गया, देखने के लिए दूर-दराज देशों में रहने वाले ज्ञानी व्यक्ति भी समझ गए कि किसी महान राजा का जन्म हुआ है। और वे उपहारों के साथ नए राजा की खोज में निकल गए। और अंततः उन्हें बेतलेहेम में ढूंढ निकाला और उसके साथ लाये कीमती उपहार भेंट किया।

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